khabarspecial/All Bollywood movies will now go on open because ...-बॉलीवुड की सभी पोर्न फिल्में अब खुलकर चलेंगी क्योकि…! अश्लीलता
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नई दिल्ली : आज अश्लीलता धरती पर वातावरण का और जीवन का एक हिस्सा बन चुकी है शायद ही दुनिये में ऐसा कोई एक इन्सान हो जिसे अश्लीलता पसंद ना हो, बूढ़ा हो या जवान सब मौका परास्त होते हैं बस अंतर जताने मात्र का है.

लाइफ कुछ तो डिजिटल हो ही चुकी है वाकी की रिलायंस जियो ने इंटरनेट फ्री देकर करा दी अब बच्चों को अश्लीलता का भविष्य देखने में बड़ी आसानी हो चुकी है. वाकी की कसार पोर्न फ़िल्में पूरी कर देती हैं.

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सेंसर बोर्ड से बाहर हुए पहलाज निहलानी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनके जाने के बाद सभी फिल्मों में पॉर्न और अश्लील सामग्री परोसी जाएगी। पहलाज निहलानी कुछ फिल्म निर्माताओं पर भी भड़के और उन पर साजिश का आरोप लगाया.

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा, ‘सेंसरशिप जरूरी है और इससे परहेज करने का मतलब है कि आप फिल्म निर्माताओं को हर फिल्म में पॉर्न और अश्लीलता परोसने की खुली छूट दे रहे हैं। अपने देश की संस्कृति और अपने पारंपरिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए सेंसरशिप जरूरी है।’

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उन्होंने कहा, हमारे देश में सिनेमैटोग्राफ ऐक्ट को भारतीय परिदृश्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। फिल्म युवाओं के दिलो-दिमाग पर खासा प्रभाव डालती हैं.

आप जितना ज्यादा फिल्मों में अश्लीलता परोसेंगे, समाज में हिंसा और अपराध की घटनाएं उतनी ही बढ़ेंगी। लोग स्वच्छ भारत का विज्ञापन देखते हैं और प्रभावित होकर सड़कों पर थूकना छोड़ देते हैं। जब उन्हें गलत चीजें दिखाईं जाएंगी तो वह गलत चीजें करने को भी प्रेरित होंगे। लोग इसे क्यों नहीं समझ पा रहे हैं?

निहलानी ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं कि सीबीएफसी का काम केवल प्रमाण पत्र देना है, सेंसरशिप करना नहीं।

सीबीएफसी को हमेशा सेंसर बोर्ड के नाम से ही जाना जाएगा, सर्टिफिकेशन बोर्ड के नाम से नहीं लेकिन सरकार में कुछ लोग यह बात भूल गए हैं।

उन्होंने लोगों को गुमराह किया है कि सीबीएफसी का काम सिर्फ प्रमाणित करना है, सेंसर करना नहीं। इस तरह से सेंसर बोर्ड काम नहीं कर सकता है। ट्राइब्यूनल भी कट मारती हैं। लेकिन कुछ प्रड्यूसर्स मुझे बदनाम करने के लिए फिल्म का अलग वर्जन ट्राइब्यूनल को दिखाते हैं।

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निहलानी ने कहा कि वह वह रेटिंग सिस्टम के पक्ष में थे। उन्होंने कहा, डिजिटल और टीवी की दुनिया में भी सेंसर की सख्त जरूरत है। आप देखिए टेलिविजन पर कैसे बाल यौन शोषण दिखाया जा रहा है.

क्या हमारे तरह के समाज में सरकार को यह सब दिखाने की अनुमति देनी चाहिए। मैंने अपना कर्तव्य ईमानदारी के साथ निभाया है.

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मुझे अपनी नियुक्ति और बर्खास्त होने की जानकारी मीडिया से ही मिली। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में सीबीएफसी भ्रष्टाचार, दलालों और एजेंटों से मुक्त हो गया था।

सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा, मैं सरकार से नाराज नहीं हूं, खासतौर पर पीएम मोदी शानदार काम कर रहे हैं, मैं हमेशा उनका प्रशंसक रहूंगा, 98 फीसदी प्रड्यूसर मुझसे खुश थे लेकिन 2 फीसदी प्रड्यूसरों के लिए दिवाली है। अब वे खुश होंगे कि जिस गलत के खिलाफ मैं लड़ाई लड़ रहा था, अब वह सब फिर से लौट आएगा।