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नई दिल्ली, खबरस्पेशल ब्यूरो न्यूज़: अयोध्या में विवादित ढांचे को लेकर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार से अंतिम सुनवाई शुरू करने जा रहा है। बता दें कि यह मामला सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी अति संवेदनशील है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की विशेष पीठ मंगलवार को इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी। सुनवाई अयोध्या में विवादित भूमि के मालिकाना हक को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह सुझाव 
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई इस मामले को शांति से सुलझाने के विफल सुझाव की पृष्ठभूमि में हो रही है। सर्वोच्च अदालत ने इस वर्ष मार्च में पक्षों को मामले को आपस में बैठकर कोर्ट से बाहर सुलझाने का सुझाव दिया था। लेकिन कोई भी पक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ.

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हालांकि, इसके बाद से यह मामला और जटिल हो गया है, क्योंकि शिया वक्फ बोर्ड ने अदालत में शपथपत्र दायर कर कहा है कि विवादित स्थल पर राम मंदिर ही बनना चाहिए

लेकिन वह इस मामले में पक्षकार नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि मस्जिद को कहीं और मुस्लिम बहुल क्षेत्र में मुनासिब दूरी पर बनाया जा सकता है, क्योंकि यह बेहद पूजनीय भगवान राम का जन्मस्थान है.

सात साल में हो चुकी हैं 20 अपील 
सितंबर 2010 से लेकर पिछले सात वर्षों में कम से कम 20 अपीलें और क्रॉस अपीलें जन्मभूमि स्थान पर मालिकाना हक को दावा कर सुप्रीम कोर्ट में दायर हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था.

मामले में लड़ रहे पक्षों में जिनमें भगवान रामलला विराजमान स्वयं भी हैं, निर्मोही अखाड़ा, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार शामिल हैं.

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हाईकोर्ट के विवादित हिस्से को तीन हिस्सों (दो हिस्से हिंदू और एक हिस्सा मुस्लिम पक्ष) में बांटने के फैसले को चुनौती देते हुए सभी पक्षों ने कहा है कि फैसला आस्था के अधार पर दिया गया और दस्तावेजी सबूतों को नहीं देखा गया.

यह फैसला अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन भी करता है, जो सभी विश्वासों को बराबर के अधिकार देते हैं। इस मामले में सर्वोच्च कोर्ट भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी, शिया वक्फ बोर्ड और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को भी सुनेगा।