ब्रेकिंग न्यूज़: मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस पर फैसला सुनाने वाले स्पेशल NIA जज ने इस वजह से दिया इस्तीफा, khabarspecial.com, khabar special hindi samachar, hindi khabar special, today's breaking news, Mecca Masjid Blast Case Judge resigns, Mecca Masjid blast case, Swami Aseemanand, Congress, BJP, concerned Patra, resignation of judge, NIA judge R Reddy resignation, Mecca Masjid case, Asaduddin Owaisi,मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस जज का इस्तीफा, मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस, स्वामी असीमानंद, कांग्रेस, भाजपा, संबित पात्रा, जज का इस्तीफा, एनआईए जज आर रेड्डी इस्तीफा, मक्का मस्जिद मामला, असदुद्दीन ओवैसी,Hindi News, News in Hindi, खबरस्पेसल, खबरस्पेसल ऑनलाइन हिंदी न्यूज़, हिंदी खबरें, हर खबर खास है

नई दिल्ली, खबरस्पेसल न्यूज़, अजित सिंह, 16-अप्रैल’2018: मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला सुनाने वाले स्पेशल एनआईए जज ने इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनआईए जज आर रेड्डी ने फैसला सुनाने के कुछ देर बाद ही ये फैसला लिया है.

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उनके इस्तीफे की अभी तक किसी ने अधिकारिक पुष्टि नहीं की है. बताते चलें कि मक्का मस्जिद धमाके पर 11 साल बाद आए फैसले के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने जहां कांग्रेस से मांग की कि वह देश से माफी मांगे.

वहीं, कांग्रेस ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाया। इस कड़ी में जज ने इस्तीफा देकर इस फैसले को और भी तूल दे दिया है। अभी तक साफ नहीं हो सका है कि जज रेड्डी ने इस्तीफा किन कारणों से दिया है.

कांग्रेस देश से माफी मांगे

मक्का मस्जिद मामले में एनआईए की विशेष अदालत से आए फैसले के बाद भाजपा से आक्रमक रुख अख्तितयार करते हुए कांग्रेस से मांग की कि वह देश से माफी मांगे। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोटों के लिए हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश की.

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने संवाददाताओं से कहा कि आज कांग्रेस के चेहरे पर से मुखौटा उतर गया है। कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही थी, लेकिन एनआईए अदालत के फैसले से उसका पर्दाफाश हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़कर देश के करोड़ों हिंदुओं का अपमान किया.

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संवित पात्रा ने कहा, भाजपा अदालत के फैसले पर टिप्पणी नहीं करती। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने एनआईए की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वह अदालत के फैसले पर सवाल उठा रही है। वहीं 2जी पर आया फैसले को सही करार दे रही थी.

हम पूछना चाहते हैं कि वह दोहरा रवैया क्यों अपना रही है. भाजपा प्रवक्ता ने कहा, अगर कांग्रेस पार्टी देश को तिल मात्र भी अपना मानती है, तो इस विषय पर देश से क्षमा याचना करे.

फैसले के बाद एजेंसी की कार्यशैली पर कांग्रेस ने खड़े किए सवाल

मक्का मस्जिद मामले में आए अदालत के फैसले पर कांग्रेस ने बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। ‘भगवा आंतकवाद’ शब्द का इस्तेमाल करने से इनकार करते हुए पार्टी ने कहा कि आतंकवाद किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही जांच एजेंसियों की कार्यशौली पर सवाल उठाया है.

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कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने धमकाने में कर रही है। सच को झूठ और झूठ को सच बनाया जा रहा है।  जब से यह सरकार आई है हर केस में ऐसा होता जा रहा है.

पार्टी प्रवक्ता पीएल पुनिया ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या पार्टी की तरफ से कभी भगवा आंतकवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। आतंक को किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.

पुनिया ने कहा कि पार्टी इस मामले में अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद प्रतिक्रिया देगी। क्योंकि, इस तरह की खबरें भी आई कि इस मामले में आरोपियों का इकबालिया बयान भी गायब हो गया था.

पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस नेता शिवराज पटिल ने कहा, यह कहना बहुत ही कठिन है कि फैसला सही है या गलत। उन्होंने कहा, वह जांच एजेंसी की ओर से दाखिल आरोपपत्र, मामले में पेश गवाहों के बयान और अभियोजन द्वारा उनके परीक्षण के तौर तरीकों से अनभिज्ञ हैं।

सही तरीके से पक्ष नहीं रखा गया : ओवैसी 

एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि मक्का मस्जिद विस्फोट मामले को एनआईए ने सही तरीके से अदालत में नहीं रखा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में अधिकतर गवाह जून 2014 के बाद से मुकर गए.

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एनआईए ने या तो मामले को ठीक तरीके से अदालत में नहीं रखा जैसा कि उससे उम्मीद की जा रही थी या वह राजनीतिक दबाव में काम कर रही थी. ओवैसी ने कहा कि मामले में न्याय नहीं हुआ है। अगर इस तरह से पक्षपातपूर्ण अभियोजन जारी रहा, तो आपराधिक न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे.

उन्होंने कहा, एनआईए और मोदी सरकार ने जमानत के खिलाफ अपील नहीं की, जो आरोपियों को 90 दिन के अंदर दे दिए गए। यह पूरी तरह पक्षपातूपर्ण जांच थी जो आतंकवाद से लड़ने के हमारे संकल्प को कमजोर करेगी.

 

 

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