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नई दिल्ली,खबरस्पेशल न्यूज़, अजित सिंह,6-फरवरी’2019: खतरनाक ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल के बाद पबजी (प्लेयर्स अननोन्स बैटल ग्राउंड ) ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी है. इस गेम के प्रभाव में आकर बच्चे चिड़चिड़े होने के साथ-साथ याददाश्त भी खो सकते हैं या फिर वह पागलपन का शिकार भी हो सकते हैं.

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सरहदी जिले जैसलमेर में भी इस खतरनाक गेम को खेलने वालों को लेकर एक सामाजिक संगठन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. इस सामाजिक संगठन का मानना है कि जैसलमेर में 50 फीसदीसे भी अधिक युवा इस खतरनाक मोबाइल गेम पबजी की लत में हैं और मानसिक बीमारी की ओर बढ रहे हैं.

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इस समाजिक संगठन ने राज्य सरकार से इस खतरनाक मोबाइल गेम को प्रतिबंधित करने की मांग भी की है. जानकारों का मानना है कि बच्चों के लिए खतरनाक साबित होने वाले इस गेम पर गुजरात सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है जबकि राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में भी इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

यह है पबजी गेम
करीब एक साल पहले वर्ष 2017 में यह गेम माइक्रोसॉफ्ट विन्डोज के लिए लांच किया गया था. बाद में इसे एंड्रॉयड पर भी लांच कर दिया गया. यह एक मल्टीप्लेयर गेम है. इसमें अन्य खिलाडिय़ों को मारना पड़ता है. इसे खेलने वाला अपनी टीम के साथ आइलैंड में उतरता है और उसे वहां छिपे अन्य खिलाडिय़ों को मारना होता है.

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आखिर में जिंदा बचने वाले को विजेता माना जाता है. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इस गेम को खेलने वालों की स्मरण शक्ति खोने का खतरा रहता है. बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और अलग-थलग रहने लगते हैं. इस गेम का दिमाग पर नशे से भी अधिक असर होता है जो बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है.

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जैसलमेर में रहने वाले पारुल इस खतरनाक गेम के आदी हो गए थे. अपने दोस्तों के कहने पर उसने यह गेम अपने मोबाइल मे लोड किया था और खेलना आरंभ किया था. पारुल ने बताया कि जैसे-जैसे उसने इसे खेलना आरंभ किया वैसे-वैसे वो इसकी जद में जाता चला गया.

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गेम का सीधा प्रभाव उसके मस्तिष्क पर पड़ना आरंभ हो गया जिससे उसे गेम के अलावा अपने आसपास का माहौल गेम जैसा ही दिखने लगा. यहां तक कि आसपास के लोग भी उसे गेम के हिसाब से एनिमी ही लगने लगे थे जिन्हें खत्म करना होता है.

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पारुल के परिजनों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने पारुल को मनोचिकित्सक को दिखाया और अब पारुल पिछले लंबे समय से मनोचिकित्सक से उपचार लेने के बाद पूरी तरह गेम के नशे से बाहर आ चुका है. पबजी गेम का बच्चों पर गलत प्रभाव दिखने के बाद गुजरात सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था. साथ ही शिक्षा विभाग को आदेश जारी किया था कि ऐसे बच्चों पर निगाह रखी जाए और उनकी यह लत छुड़वाई जाए.

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दिल्ली बाल संरक्षण आयोग ने भी इस गेम को लेकर अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यह बच्चों के लिये खतरनाक साबित हो सकता है और आयोग ने स्कूली प्रधानाध्यापकों को बच्चों के बीच जाकर इस गेम की लत की जांच करने के लिये भी कहा है.

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दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परीक्षा पर चर्चा के दौरान बोर्ड परीक्षार्थियों से रूबरू हुए थे. इस दौरान जब किसी अभिभावक ने कहा कि उनका बच्चा मोबाइल में गेम अधिक खेलता है तो प्रधानमंत्री ने कहा था कि पबजी वाला गेम तो नहीं खेल रहा.

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