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नई दिल्ली, खबरस्पेशल न्यूज़, वर्षा सागर, 20-जून’2018: जम्मू और कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद अब राज्यपाल शासन की ओर बढ़ रहा है. राज्य के मौजूदा राज्यपाल एनएन वोहरा का कार्यकाल खत्म होने को है ऐसे में कुछ नए चेहरे हैं जो इस पद के लिए दौड़ में हैं.

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हालांकि सूत्रों के अनुसार जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल के बदलाव से अमरनाथ यात्रा को खतरा हो सकता है. ऐसे में लग रहा है कि एनएन वोहरा को कम से कम 3 महीने का एक्सटेंशन मिल सकता है. ऐसे में कुछ नामों पर अब अटकलें तेज हो गई हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हुसैन

श्रीनगर स्थित चिनार कोर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हुसैन को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया जा सकता है. हुसैन के पास आम जनता से जुड़े होने की विरासत है. जनरल हुसैन ने 2010-2011 में जम्मू-कश्मीर में जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में ऑपरेशन सद्भावना को लीड किया था, जिससे घाटी में शांति लाने में कामयाबी मिली थी.

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ब्रिगेडियर के रूप में हुसैन ने उत्तरी कश्मीर के उरी में नियंत्रण रेखा पर कमांडर, 12 इन्फैंट्री ब्रिगेड के रूप में कार्य किया. बारामुला में 19 इन्फैंट्री डिवीजन के बाद लेफ्टिनेंट  जनरल हुसैन को अक्टूबर 2010 में जनरल ऑफिसर कमांडिंग 15 कोर के रूप में तैनात किया गया था.

दिनेश्वर शर्मा

कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा भी जम्मू-कश्मीर के नए गवर्नर की दौड़ में शामिल हैं. पूर्व खुफिया ब्यूरो (आईबी) प्रमुख दिनेश्वर शर्मा, जिन्हें जम्मू-कश्मीर में लोगों के सभी वर्गों के साथ बातचीत करने के लिए सरकार के विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था.

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केरल काडर के 1979-बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें दिसंबर 2014 में 2 साल की अवधि के लिए आईबी का निदेशक नियुक्त किया गया था. शर्मा ने पहले आईबी प्रमुख के रूप में अजीत डोभाल के साथ काम किया था. उन्होंने उत्तर प्रदेश के सहायक खुफिया ब्यूरो की अध्यक्षता भी की जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह वहां मुख्यमंत्री थे.

राजीव महर्षि
राजीव महर्षि, 1978 बैच  के राजस्थान काडर के आईएएस अधिकारी हैं. इन्होंने नौकरशाह के रूप में अपनी चार दशक की यात्रा तय की है. इन्हें भी जम्मू-कश्मीर के संभावित गवर्नर के रूप में देखा जा रहा है. महर्षि भारत के मौजदूा नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) और संयुक्त राष्ट्र बोर्ड ऑफ ऑडिटर के अध्यक्ष हैं.

ए एस दुलत

रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने बार-बार संकेत दिया था कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन 2018 तक नहीं टिकेगा. कश्मीर में कई राजनीतिक पंडित कहते हैं कि दुलत अगले राज्यपाल हो सकते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान श्रीनगर में आईबी के विशेष निदेशक के रूप में एएस दुलत ने कई सालों तक कश्मीर में काम किया है.

इस दौरान उन्होंने खुफिया नेटवर्क की निगरानी ही नहीं की, बल्कि वे वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान पीएमओ में कश्मीर पर भी सलाहकार थे. उन्होंने ‘कश्मीर: द वाजपेयी इयर्स’ और ‘द स्पाई क्रॉनिकल्स: रॉ, आईएसआई और द इल्यूशन ऑफ पीस’ भी लिखी है.