अब लोकसभा चुनाव से पहले महिलाएं तय करेंगी कि संसद में कौन बैठेगा, अब लड़ाई 33 की नहीं 50 फीसद की होगी, Khabarspecial Hindi News, Khabar Special Online News, Khabarspecial Hindi Samachar, Women in politics, parliament, lok sabha elections 2019, election 2019, reservation of women in india, women empowerment, pm narendra modi, India News in Hindi, Latest India News Updates, नेशनल अलायंस फॉर वूमेन्स रिजर्वेशन बिल, महिलाओं को सशक्तिकरण, कांस्टिट्यूशन क्लब में 'नेशनल अलायंस फॉर वूमेन्स रिजर्वेशन बिल, भारत में महिलाओं की स्थिति पर एक नजर, जहर खा लेंगे, तो कोई बोला परकटी महिला को ही सीट मिलेगी

नई दिल्ली, खबरस्पेशल न्यूज़, अजित सिंह, 4-दिसंबर’2018: महिलाओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने हकों की लड़ाई का बिगुल बजा दिया है। ‘नेशनल अलायंस फॉर वूमेन्स रिजर्वेशन बिल‘ संगठन की पदाधिकारी डॉ. रंजना कुमारी ने साफ तौर से कहा है कि अगले चुनाव में महिलाएं तय करेंगी कि संसद में कौन बैठे या न बैठे। जब महिलाएं इतना कुछ करेंगी तो फिर यह भी मानकर चलें कि अगली सरकार कौन बनाएगा, इसका निर्धारण भी महिलाएं ही करेंगी।

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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं को सशक्तिकरण के नाम पर एक चूल्हा और सिलेंडर थमा दिया है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत महिलाओं को घर की चाहरदीवारी के भीतर बैठाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि सरकार अपनी इस चाल में कामयाब नहीं होगी। अब हमारी लड़ाई 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि संसद में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व कराने की है.

मंगलवार को कांस्टिट्यूशन क्लब में ‘नेशनल अलायंस फॉर वूमेन्स रिजर्वेशन बिल’ के समर्थन में कई महिला संगठनों की प्रतिनिधियों ने अपनी आवाज बुलंद की। डॉ. रंजना ने कहा कि मीटू के बाद पुरुष प्रधान समाज के कई लोगों को भय लगने लगा है कि अब महिलाएं बोलेंगी.

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अभी हाल में जिन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां का डॉटा उठाकर देंखे तो महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा है. उन्होंने कहा कि इस साल महिला संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय लेने के लिए उन्हें पांच हजार पत्र लिखे हैं, मगर एक पत्र का भी जवाब नहीं मिला। अब इसी से मोदी सरकार की महिलाओं के प्रति सोच का अंदाजा लगा सकते हैं.

जहर खा लेंगे, तो कोई बोला परकटी महिला को ही सीट मिलेगी

महिला पदाधिकारियों का कहना था कि वे 23 साल से महिला आरक्षण विधेयक को पारित करवाने की लड़ाई लड़ रही हैं। महिलाओं के पचास फीसदी वोट लेकर संसद में पहुंचने वाले नेता भी समय पर मुंह फेर लेते हैं। संसद में जब इस बिल को आगे बढ़ाने की बारी आई तो कई सांसद तैश में आ गए।कोई बोला, अगर यह विधेयक पारित हुआ तो मैं जहर खा लूंगा तो किसी ने कहा, परकटी महिलाओं को ही सीट मिलेगी।

सरकार में आने से पहले जो नेता खुलकर हमारा साथ दे रहे थे, आज वे चुप हैं। राज्यसभा सांसद राजीव गौड़ा का कहना था कि आज महिलाएं पुरुषों का हर कदम पर साथ दे रही हैं। संसद में 50 फीसदी सीटें अगर महिलाओं को मिलती हैं तो यह किसी पर अहसान नहीं है, बल्कि उनका हक है।

भारत में महिलाओं की स्थिति पर एक नजर

जॉर्ज टाउन इंस्टीट्यूट ग्लोबल रैंकिंग ऑफ वूमेन इंक्लूजन एंड वेल बींग, की रिपोर्ट में भारत का नंबर 131वां है। इस सर्वे रिपोर्ट में कुल 152 देश शामिल किए गए हैं। टॉप 5 देशों में आयरलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन हैं। भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति को देखें तो पाकिस्तान 150, अफगानिस्तान 152, बांग्लादेश 127, म्यांमार 119, भूटान 108, नेपाल 85, चीन 87 और श्रीलंका 97 वें स्थान पर है.

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साल 2012 के दौरान भारत में एक लाख महिलाओं के पीछे अपराध होने की दर 41.7 फीसदी थी, जबकि 2016 में यह दर बढ़ कर 55.2 फीसदी हो गई है। अगर दस साल पहले यानी 2007 की बात करें तो भारत में हर घंटे 21 महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं होती थी, 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 39 हो गया है।

भारत में अभी तक राष्ट्रीय विधायिका में केवल 12 फीसदी महिलाएं

महिलाओं का विधायिका में प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर बात की जाए तो भारत में केवल 12 फीसदी महिलाएं ही राष्ट्रीय विधायिका में स्थान पा सकी हैं। खास बात है कि जनसंख्या में महिलाओं का प्रतिशत 48 है। आयरलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन की विधायिका तीस फीसदी सीटों पर महिलाएं हैं।

न्यूजीलैंड में 38 फीसदी महिलाओं का संसदीय सीटों पर कब्जा है। अमेरिका में सीनेट के दोनों सदनों को देखें तो महिलाओं का प्रतिशत 22 है। भारत में फिलहाल निम्न सदन यानी लोकसभा की 542 सीटों में से 64 पर महिलाएं हैं, जबकि उपरी सदन यानी राज्यसभा में 237 सीटों में से 27 पर महिलाएं हैं।

ये आंकड़े भी कुछ कहते हैं 

साल      महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं 
2013          309546
2014          339457
2015          329243
2016          338954मातृ-मृत्यु दर – 130/एक लाख जीवित जन्म पर
शिशु मृत्यु दर – 34/एक हजार जीवित जन्म पर
लिंगानुपात – 943
शिशु लिंगानुपात – 919
महिला साक्षरता दर – 65.46
साक्षरता दर में लिंग भेद – 16.8
महिलाओं का भूमि पर स्वामित्व – 12.8 फीसदी से कम
महिला रोजगार दर – 25.3 प्रतिशत
महिला रोजगार में गिरावट 10 साल में – 30.2 प्रतिशत से 25.3 पर
महिला विधानसभा सदस्यों की भागेदारी – 9 फीसदी
महिला सांसदों की भागेदारी – 11.8 फीसदी

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